
मेरा एक ही बेटा है नज़ीर और उसकी माँका देहांत तभी हो गया जब वो १६ साल का था। मैंने उसे एक बोर्डिंग स्कूल में डाला और वो engineer बन गया और उसने बंगलोर मेंएक कम्पनी में नौकरी कर ली।जब वो २४ साल का था तो मैंने उसकी शादी के लिए लड़कियाँ देखनी शुरू कीं। यहाँ ये बता दूँ कि पत्नी के देहांत के बाद मैंने अपनी ऑफ़िस की औरतों को पटा के चोदने का काम जारी रखा।मैंने कभी किसी के साथ ज़बरदस्ती नहीं की,मैं ऐसी औरतों को पटाता था जो की किसी कारण से दुखी होती थीं।ज़्यादातर औरतें अपनी पतियों से शारीरिक या मानसिक रूप से असंतुष्ट थीं और कुछ को पैसा चाहिए था। मेरा काम चल रहा था मुझे ज़िंदगी से कोई शिकायत नहीं थी।बस नज़ीर के लिए एक अछी सी लड़की चाहिए थी।
नज़ीर की शादी हो गयी. शादी के बाद हमारी बहु घर आ गयी, और इस तरह नूरी हमारी बहु बन गयी।







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