
तो उस दिन बाबूजी ने मुझे जमकर चुदाई करने लगे... बाबूजी की चुदाई से मुझे बहुत आनंद आ रही है। मैं अपनी बुर के मांस पेशियों (muscles) को टाइट करि जिस से अब उनका मुस्सल मेरे अंदर अब टाइट जाने लगी। "ओफ्फ.. हेमा..मै... डिअर.. क्या कसी है तेरी बुर.. कहाँ से सीखी यह सब... बहुत कम महिलाएं जानते है यह ट्रिक... शबाश.. वैसे ही कस के रखना... ओह अब मेरी भी निकलने वाली है... आअह्ह्ह'.." और बाबूजी का शरीर अकड़ने लगा। मैं समझ गयी की अब वह झड़ने वाले है।
"हाँ.. मेरे ससुरजी.. मेरे प्यारे ससुरजी... चोदो अपनी लाड़ली बहु को जी भर के.. लेकिन अब मैं असुरक्षित हूँ.. मेरे में नहीं झड़ना.. बाहर निकाल लीजिये..." कहते में उन्हें मेरे ऊपर से धकेल ने की कोशिश की। ससुरजी मुझे और जोर से जकड़ते बोले "गभराओ नहीं बहु... मेरे नसे बंद हो कर 15 वर्ष हो गये है... अब में किसी की भी चोदू, उसे गर्भ नहीं ठहरता... तुम सेफ रहोगी...फिर भी तुम कहो तो" कहते वह अपना लिंग बाहर निकलने लगे।







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